रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुये
सारा जीवन श्रापित श्रापित हर रिशता बेनाम कहो मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो तो किसे लिखु मै प्रेम की पाती किसे लिखु मै प्रेम की पाती कैसे कैसे इंसान हुये कि किसे लिखु मै प्रेम की पाती कैसे कैसे इंसान हुये अरे रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुये रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुये कि मन कहता है मन करता है,कुछ तो माँ के नाम लिखु कि मन कहता है मन करता है,कुछ तो माँ के नाम लिखु और एक मेरी जननी को लिख दु, एक धरती के नाम लिखु प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा धरती संताप नही देती कि प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा धरती संताप नही देती और धरती मेरी माँ होती तो,मुझको श्राप नही देती तो जननी माँ ने वचन लिया, जननी माँ ने वचन लिया अर्जुन का काल नही हुँ मै कि जननी माँ ने वचन लिया अर्जुन का काल नही हुँ मै अरे जो बेटा गंगा मे छोड़े,उस कुंती का लाल नही हुँ मैं जो बेटा गंगा मे छोड़े,उस कुंती का लाल नही हुँ मैं तो क्या लिखना इन्हे प्रेम की पाती क्या लिखना इन्हे प्रेम की पाती,जो मेरी ना पहचान हुये अरे रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुये कि सारे जग का तम हरते बेट...